रेलवे के पानी में ‘मल’ वाला बैक्टीरिया, बड़े स्टेशनों की कैग रिपोर्ट ने खोली पोल

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश के कई बड़े स्टेशनों पर पीने के पानी में इंसान के मल में पाया जाने वाला खतरनाक ‘ई.कोलाई’ बैक्टीरिया मिला है। इस खुलासे ने रेलवे के स्वच्छता दावों की पोल खोलकर रख दी है।

‘भारतीय रेलवे में गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाएं और स्वच्छता’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में बताया गया है कि दक्षिणी रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़, दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद, मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला के साथ-साथ पूर्वी रेलवे के मधुपुर स्टेशन के वाटर कूलर से पानी के नमूने लिए गए थे। इन सभी जगहों के पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। चिंता की बात यह है कि साल 2022-23 के दौरान आठ जोन के करीब 49 और 2023-24 में 56 स्टेशनों के पानी में भी यह जानलेवा बैक्टीरिया पाया गया था।

यह रिपोर्ट 12 अगस्त को संसद में पेश की गई थी।

कैग ने देश भर के 512 गैर-उपनगरीय स्टेशनों का विस्तृत ऑडिट किया। जांच में सामने आया कि इनमें से 458 स्टेशन यानी 89% से अधिक न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं के तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। कई प्रमुख स्टेशनों पर पीने के पानी, बैठने की व्यवस्था, शौचालय, पंखे, शेड और इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड जैसी बुनियादी चीजें या तो उपलब्ध ही नहीं थीं, या जरूरत से काफी कम थीं।

जांच में कई जगह पानी की गुणवत्ता में खामियां मिलीं। कोयंबटूर, पालक्काड, हैदराबाद, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, कल्याण, लोनावला और मधुपुर समेत कई स्टेशनों के वाटर कूलर के पानी में उक्त बैक्टीरिया पाया गया। छह रेलवे जोन के 59 स्टेशनों पर पानी की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच भी नहीं हुई। इसके अलावा 458 स्टेशनों पर न्यूनतम जरूरी यात्री सुविधाएं मानकों के मुताबिक नहीं मिलीं। कैग ने रेलवे को पानी की गुणवत्ता की व्यापक जांच और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने की सिफारिश की है।

रेलवे बोर्ड ने अप्रैल 2018 में निर्देश जारी किए थे कि 31 अगस्त 2018 तक सभी स्टेशनों पर अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाएं। हालांकि, रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि एनएसजी-1 श्रेणी के प्रीमियम स्टेशन, जैसे नई दिल्ली, सीएसएमटी (मुंबई), हावड़ा, सियालदह और मुंबई सेंट्रल भी यूरिनल, शौचालय, डस्टबिन, पानी के नल और साइन बोर्ड जैसी सुविधाओं में पिछड़े हुए हैं।

कैग ने रेलवे मंत्रालय को सुझाव दिया है कि जल आपूर्ति प्रणालियों के निरीक्षण के लिए तय प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाए। इसके साथ ही, यूनिफॉर्म ड्रिंकिंग वाटर क्वालिटी प्रोटोकॉल के तहत सभी स्टेशनों पर पीने के पानी की नियमित और व्यापक जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि यात्रियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा हो सके।

ई कोलाई जिसे एस्चेरिचिया कोलाई भी कहा जाता है, एक आम तरह का बैक्टीरिया है जो पेट खराब होने और फूड पॉइजनिंग का कारण बनता है। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, यह कई तरह के खाने-पीने की चीज़ों, पर्यावरण और इंसानों समेत स्तनधारी जीवों की आंतों में पाया जा सकता है।

इसके एक जानलेवा होने के बहुचर्चित केस की बात करें ये  मिस्र के एक होटल में ई कोलाई का हाई लेवल पाया गया जहां ब्रिटेन के एक जोड़े की मौत हो गई थी। हालांकि ई कोलाई के कई स्ट्रेन (प्रकार) आमतौर पर संपर्क में आने वाले व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ गए और ई कोलाई से जुड़ी बीमारी के कारण उनकी मौत भी हो गई।

अमेरिकी राज्य मिनिसोटा स्थित मेयो क्लिनिक के मुताबिक, इस बैक्टीरिया से संक्रमित होने के लक्षण दिखने में लगभग तीन या चार दिन लग सकते हैं. लक्षणों में दस्त (जो हल्के हो सकते हैं या जिनमें खून आ सकता है), पेट में दर्दनाक ऐंठन, जी मिचलाना या उल्टी होना शामिल हैं। यह सिस्टाइटिस, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन और निमोनिया जैसी कई तरह की बीमारियां भी पैदा कर सकता है।

(जनचौक ब्यूरो)

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